Lalita Sahasranama Stotra in Sanskrit
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Dyanam
Parayanam
ध्यानम्
सिन्दूरारुण-विग्रहां त्रिनयनां माणिक्य-मौलिस्फुरत्
तारानायक-शेखरां स्मितमुखी-मापीन वक्षोरुहाम्।
पाणिभ्या-मलिपूर्ण-रत्नचषकं रक्तोत्पलं विभ्रतीं
सौम्यां रत्नघटस्थ-रक्तचरणां ध्यायेत्-परामम्बिकाम्॥
अरुणां करुणा तरङ्गिताक्षीं
धृत-पाशाङ्कुश-पुष्प-बाण-चापाम्।
अणिमादिभि-रावृतां मयुखैः
अहमित्येव विभावये भवानीम्॥
ध्यायेत् पद्मासनस्थां विकसित-वदनां पद्मपत्रायताक्षीं
हेमाभां पीतवस्त्रां करकलित-लसद्धेम-पद्मां वराङ्गीम्।
सर्वालङ्कारयुक्तां सततमभयदां भक्तनम्रां भवानीं
श्रीविद्यां शान्तमूर्तिं सकलसुरनुतां सर्वसम्पत्-प्रदात्रीम्॥
सकुङ्कुम-विलेपना-मळिकचुम्बि कस्तूरिकां
समन्द-हसितेक्षणां स-शर-चाप-पाशाङ्कुशाम्।
अशेषजन मोहिनीं अरुण माल्य-भूषाम्बरां
जपाकुसुम भासुरां जपविधौ स्मरे-दम्बिकाम्॥
अथ श्रीललितासहस्रनाम स्तोत्रम्
ॐ श्रीमाता श्रीमहाराज्ञी श्रीमत्-सिंहासनेश्वरी।
चिदग्नि-कुण्ड-संभूता देवकार्य-समुद्यता॥ १॥
उद्यद्भानु-सहस्राभा चतुर्बाहु-समन्विता।
रागस्वरूप-पाशाढ्या क्रोधाकाराङ्कुशोज्ज्वला॥ २॥
मनोरूपेक्षु-कोदण्डा पञ्च-तन्मात्र-सायका।
निजारुण-प्रभापूर-मज्जद्-ब्रह्माण्ड-मण्डला॥ ३॥
चम्पकाऽशोक-पुन्नाग-सौगन्धिक-लसत्कचा।
कुरुविन्दमणि-श्रेणी-कनत्कोटीर-मण्डिता॥ ४॥
अष्टमीचन्द्र-विभ्राज-दलिकस्थल-शोभिता।
मुखचन्द्र-कलङ्काभ-मृगनाभि-विशेषका॥ ५॥
वदनस्मर-माङ्गल्य-गृहतोरण-चिल्लिका।
वक्त्र-लक्ष्मी-परीवाह-चलन्मीनाभलोचना॥ ६॥
नवचम्पक-पुष्पाभ-नासादण्ड-विराजिता।
ताराकान्ति-तिरस्कारि-नासाभरण-भासुरा॥ ७॥
कदम्ब-मञ्जरीकॢप्त-कर्णपूर-मनोहरा।
ताटङ्कयुगलीभूत तपनोडुप-मण्डला॥ ८॥
पद्मराग-शिलादर्श परिभावि-कपोलभूः।
नवविद्रुम-बिम्बश्री-न्यक्कारि-रदनच्छदा॥ ९॥
शुद्ध-विद्याङ्कुराकार-द्विजपङ्क्ति-द्वयोज्ज्वला।
कर्पूर-वीटिकामोद-समाकर्षद्-दिगन्तरा॥ १०॥
निजसल्लाप-माधुर्य-विनिर्भर्त्सित-कच्छपी।
मन्दस्मित-प्रभापूर-मज्जत्-कामेश-मानसा॥ ११॥
अनाकलित-सादृश्य-चिबुकश्री-विराजिता।
कामेश-बद्ध-माङ्गल्यसूत्र-शोभित-कंधरा॥ १२॥
कनकाङ्गद-केयूर-कमनीय-भुजान्विता।
रत्नग्रैवेय-चिन्ताक-लोल-मुक्ता-फलान्विता॥ १३॥
कामेश्वर-प्रेमरत्न-मणि-प्रतिपण-स्तनी।
नाभ्यालवाल-रोमालि-लता-फल-कुचद्वयी॥ १४॥
लक्ष्यरोम-लताधारता-समुन्नेय-मध्यमा।
स्तनभार-दलन्-मध्य-पट्टबन्ध-वलित्रया॥ १५॥
अरुणारुण कौसुम्भ-वस्त्र-भास्वत्-कटीतटी।
रत्न-किङ्किणिकारम्य-रशना-दाम-भूषिता॥ १६॥
कामेश-ज्ञात-सौभाग्य-मार्दवोरु-द्वयान्विता।
माणिक्य-मकुटाकार-जानुद्वय-विराजिता॥ १७॥
इन्द्रगोप-परिक्षिप्त-स्मरतूणाभ-जंघिका।
गूढगुल्फा कूर्मपृष्ठ-जयिष्णु-प्रपदान्विता॥ १८॥
नखदीधिति-संछन्न-नमज्जन-तमोगुणा।
पदद्वय-प्रभाजाल-पराकृत-सरोरुहा॥ १९॥
सिञ्जान-मणिमञ्जीर-मण्डित-श्री-पदाम्बुजा।
मराली-मन्दगमना महालावण्य-शेवधिः॥ २०॥
सर्वारुणा-ऽनवद्याङ्गी सर्वाभरण-भूषिता।
शिव-कामेश्वराङ्कस्था शिवा स्वाधीन-वल्लभा॥ २१॥
सुमेरु-मध्यशृङ्गस्था श्रीमन्नगर-नायिका।
चिन्तामणि-गृहान्तस्था पञ्च-ब्रह्मासनस्थिता॥ २२॥
महापद्माटवी-संस्था कदम्बवन-वासिनी।
सुधासागर-मध्यस्था कामाक्षी कामदायिनी॥ २३॥
देवर्षिगण-संघात-स्तूयमानात्म-वैभवा।
भण्डासुर-वधोद्युक्त-शक्तिसेना-समन्विता॥ २४॥
सम्पत्करी-समारूढ-सिंधुर-व्रजसेविता।
अश्वारूढा-ऽधिष्ठिताश्व-कोटि-कोटिभि-रावृता॥ २५॥
चक्रराज-रथारूढ-सर्वायुध-परिष्कृता।
गेयचक्र-रथारूढ-मन्त्रिणी-परिसेविता॥ २६॥
किरिचक्र-रथारूढ दण्डनाथा-पुरस्कृता।
ज्वालामालिनिकाक्षिप्त-वह्निप्राकार-मध्यगा॥ २७॥
भण्डसैन्य-वधोद्युक्त-शक्तिविक्रम-हर्षिता।
नित्या पराक्रमाटोप-निरीक्षण-समुत्सुका॥ २८॥
भण्डपुत्र-वधोद्युक्त-बाला-विक्रम-नन्दिता।
मन्त्रिण्यम्बा-विरचित-विषङ्गवध-तोषिता॥ २९॥
विशुक्र-प्राणहरण-वाराही-वीर्य-नन्दिता।
कामेश्वर-मुखालोक-कल्पित-श्रीगणेश्वरा॥ ३०॥
महागणेश-निर्भिन्न-विघ्नयन्त्र-प्रहर्षिता।
भण्डासुरेन्द्र-निर्मुक्त-शस्त्र-प्रत्यस्त्र-वर्षिणी॥ ३१॥
कराङ्गुलि-नखोत्पन्न-नारायण-दशाकृतिः।
महा-पाशुपतास्त्राग्नि-निर्दग्धासुर-सैनिका॥ ३२॥
कामेश्वरास्त्र-निर्दग्ध-सभण्डासुर-शून्यका।
ब्रह्मोपेन्द्र-महेन्द्रादि-देवसंस्तुत-वैभवा॥ ३३॥
हरनेत्राग्नि-संदग्ध-कामसंजीवनौषधिः।
श्रीमद्-वाग्भवकूटैक-स्वरूप-मुखपङ्कजा॥ ३४॥
कण्ठाधः-कटिपर्यन्त-मध्यकूट-स्वरूपिणी।
शक्तिकूटैकतापन्न-कट्यधो-भागधारिणी॥ ३५॥
मुलमन्त्रात्मिका मूलकूटत्रय-कलेबरा।
कुलामृतैक-रसिका कुलसंकेत-पालिनी॥ ३६॥
कुलाङ्गना कुलान्तस्था कौलिनी कुलयोगिनी।
अकुला समयान्तस्था समयाचार-तत्परा॥ ३७॥
मूलाधारैक-निलया ब्रह्मग्रन्थि-विभेदिनी।
मणिपूरान्तरुदिता विष्णुग्रन्थि-विभेदिनी॥ ३८॥
आज्ञा-चक्रान्तरालस्था रुद्रग्रन्थि-विभेदिनी।
सहस्राराम्बुजारूढा सुधासाराभि-वर्षिणी॥ ३९॥
तडिल्लता-समरुचिः षट्चक्रोपरि-संस्थिता।
महासक्तिः कुण्डलिनी बिसतन्तु-तनीयसी॥ ४०॥
भवानी भावनागम्या भवारण्य-कुठारिका।
भद्रप्रिया भद्रमूर्तिः भक्त-सौभाग्य-दायिनी॥ ४१॥
भक्तिप्रिया भक्तिगम्या भक्तिवश्या भयापहा।
शांभवी शारदाराध्या शर्वाणी शर्मदायिनी॥ ४२॥
शांकरी श्रीकरी साध्वी शरच्चन्द्र-निभानना।
शातोदरी शान्तिमती निराधारा निरंजना॥ ४३॥
निर्लेपा निर्मला नित्या निराकरा निराकुला।
निर्गुणा निष्कला शान्ता निष्कामा निरुपप्लवा॥ ४४॥
नित्यमुक्ता निर्विकारा निष्प्रपञ्चा निराश्रया।
नित्यशुद्धा नित्यबुद्धा निरवद्या निरन्तरा॥ ४५॥
निष्कारणा निष्कलङ्का निरुपाधिः निरीश्वरा।
नीरागा रागमथनी निर्मदा मदनाशिनी॥ ४६॥
निश्चिन्ता निरहंकारा निर्मोहा मोहनाशिनी।
निर्ममा ममताहन्त्री निष्पापा पापनाशिनी॥ ४७॥
निष्क्रोधा क्रोधशमनी निर्लोभा लोभनाशिनी।
निःसंशया संशयघ्नी निर्भवा भवनाशिनी॥ ४८॥
निर्विकल्पा निराबाधा निर्भेदा भेदनाशिनी।
निर्नाशा मृत्युमथनी निष्क्रिया निष्परिग्रहा॥ ४९॥
निस्तुला नीलचिकुरा निरपाया निरत्यया।
दुर्लभा दुर्गमा दुर्गा दुःखहन्त्री सुखप्रदा॥ ५०॥
दुष्टदूरा दुराचार-शमनी दोषवर्जिता।
सर्वज्ञा सान्द्रकरुणा समानाधिक-वर्जिता॥ ५१॥
सर्वशक्तिमयी सर्वमङ्गला सद्गतिप्रदा।
सर्वेश्वरि सर्वमयी सर्वमन्त्र-स्वरूपिणी॥ ५२॥
सर्वयन्त्रात्मिका सर्वतन्त्ररूपा मनोन्मनी।
माहेश्वरी महादेवी महालक्ष्मी मृडप्रिया॥ ५३॥
महारूपा महापूज्या महापातक-नाशिनी।
महामाया महासत्त्वा महाशक्तिः महारतिः॥ ५४॥
महाभोगा महैश्वर्या महावीर्या महाबला।
महाबुद्धिः महासिद्धिः महायोगेश्वरेश्वरी॥ ५५॥
महातन्त्रा महामन्त्रा महायन्त्रा महासना।
महायाग-क्रमाराध्या महाभैरवपूजिता॥ ५६॥
महेश्वर महाकल्प महाताण्डव-साक्षिणी।
महाकामेश-महिषी महात्रिपुरसुन्दरी॥ ५७॥
चतुष्षष्ट्-युपचाराढ्या चतुष्षष्टि-कलामयी।
महाचतुष्षष्टिकोटि-योगिनीगण-सेविता॥ ५८॥
मनुविद्या चन्द्रविद्या चन्द्र-मण्डल-मध्यगा।
चारुरूपा चारुहासा चारुचन्द्र-कलाधरा॥ ५९॥
चराचर-जगन्नाथा चक्रराज-निकेतना।
पार्वती पद्मनयना पद्मराग-समप्रभा॥ ६०॥
पञ्चप्रेतासनासीना पञ्चब्रह्म-स्वरुपिणी।
चिन्मयी परमानन्दा विज्ञान-घनरूपिणी॥ ६१॥
ध्यान-ध्यातृ-ध्येयरूपा धर्माऽधर्म-विवर्जिता।
विश्वरुपा जागरिणी स्वपन्ती तैजसात्मिका॥ ६२॥
सुप्ता प्राज्ञात्मिका तुर्या सर्वावस्था-विवर्जिता।
सृष्टिकर्त्री ब्रह्मरूपा गोप्त्री गोविन्दरूपिणी॥ ६३॥
संहारिणी रुद्ररूपा तिरोधानकरीश्वरी।
सदाशिवा-ऽनुग्रहदा पञ्चकृत्य-परायणा॥ ६४॥
भानुमण्डल-मध्यस्था भैरवी भगमालिनी।
पद्मासना भगवती पद्मनाभ-सहोदरी॥ ६५॥
उन्मेष-निमिषोत्पन्न-विपन्न-भुवनावली।
सहस्रशीर्ष-वदना सहस्राक्षी सहस्रपात्॥ ६६॥
आब्रह्म-कीट-जननी वर्णाश्रम-विधायिनि।
निजाज्ञारूप-निगमा पुण्याऽपुण्य-फलप्रदा॥ ६७॥
श्रुति-सीमन्त-सिन्दूरी-कृत-पादाब्जधूलिका।
सकलागम-संदोह-शुक्ति-संपुट-मौक्तिका॥ ६८॥
पुरुषार्थ-प्रदा पूर्णा भोगिनी भुवनेश्वरी।
अंबिका-ऽनादिनिधना हरिब्रह्मेन्द्र-सेविता॥ ६९॥
नारायणी नादरूपा नामरूप-विवर्जिता।
ह्रींकारी ह्रीमती हृद्या हेयोपादेय-वर्जिता॥ ७०॥
राजराजार्चिता राज्ञी रम्या राजीवलोचना।
रंजनी रमणी रस्या रणत्किङ्किणि-मेखला॥ ७१॥
रमा राकेन्दु-वदना रतिरूपा रतिप्रिया।
रक्षाकरी राक्षसघ्नी रामा रमणलम्पटा॥ ७२॥
काम्या कामकलारूपा कदम्बकुसुमप्रिया।
कल्याणी जगती-कन्दा करुणारस-सागरा॥ ७३॥
कलावती कलालापा कान्ता कादम्बरी-प्रिया।
वरदा वामनयना वारुणी-मद-विह्वला॥ ७४॥
विश्वाधिका वेदवेद्या विन्ध्याचल-निवासिनी।
विधात्री वेदजननी विष्णुमाया विलासिनी॥ ७५॥
क्षेत्र-स्वरूपा क्षेत्रेशी क्षेत्रक्षेत्रज्ञ-पालिनी।
क्षयवृद्धि-विनिर्मुक्ता क्षेत्रपाल-समर्चिता॥ ७६॥
विजया विमला वन्द्या वन्दारु-जन-वत्सला।
वाग्वादिनी वामकेशी वह्निमण्डल-वासिनी॥ ७७॥
भक्तिमत्-कल्पलतिका पशुपाश-विमोचिनी।
संहृताशेष-पाषण्डा सदाचार-प्रवर्तिका॥ ७८॥
तापत्रयाग्नि-संतप्त समाह्लादन-चन्द्रिका।
तरुणी तापसाराध्या तनुमध्या तमोपहा॥ ७९॥
चितिस्-तत्पद-लक्ष्यार्था चिदेकरस-रूपिणी।
स्वात्मानन्द-लवीभूत-ब्रह्माद्यानन्द-संततिः॥ ८०॥
परा प्रत्यक्-चिती-रूपा पश्यन्ती परदेवता।
मध्यमा वैखरी-रूपा भक्त-मानस-हंसिका॥ ८१॥
कामेश्वर-प्राणनाडी कृतज्ञा कामपूजिता।
शृङ्गार-रस-संपूर्णा जया जालन्धर-स्थिता॥ ८२॥
ओड्याण-पीठ-निलया बिन्दुमण्डल-वासिनी।
रहो-यागक्रमाराध्या रहस्तर्पण-तर्पिता॥ ८३॥
सद्यः प्रसादिनी विश्वसाक्षिणी साक्षिवर्जिता।
षडङ्ग-देवतायुक्ता षाड्गुण्य-परिपूरिता॥ ८४॥
नित्यक्लिन्ना निरुपमा निर्वाणसुखदायिनी।
नित्या-षोडशिकारूपा श्रीकण्ठार्ध-शरीरिणी॥ ८५॥
प्रभावती प्रभारूपा प्रसिद्धा परमेश्वरी।
मूलप्रकृति-रव्यक्ता व्यक्ताऽव्यक्त-स्वरूपीणि॥ ८६॥
व्यापिनी विविधाकारा विद्याऽविद्या-स्वरूपिणी।
महाकामेश-नयन-कुमुदाह्लाद-कौमुदी॥ ८७॥
भक्तहार्द-तमोभेद-भानुमद्भानुसन्ततिः।
शिवदूती शिवाराध्या शिवमूर्तिः शिवंकरी॥ ८८॥
शिवप्रिया शिवपरा शिष्टेष्टा शिष्टपूजिता।
अप्रमेया स्वप्रकाशा मनोवाचामगोचरा॥ ८९॥
चिच्छक्तिश्-चेतना-रूपा जडशक्तिर्-जडात्मिका।
गायत्री व्याहृतिः संध्या द्विजबृन्द-निषेविता॥ ९०॥
तत्वासना तत्त्वमयी पञ्चकोशान्तर-स्थिता।
निःसीम-महिमा नित्य-यौवना मदशालिनी॥ ९१॥
मदघूर्णित-रक्ताक्षी मदपाटल-गण्डभूः।
चन्दन-द्रव-दिग्धाङ्गी चाम्पेय-कुसुमप्रिया॥ ९२॥
कुशला कोमलाकारा कुरुकुल्ला कुलेश्वरी।
कुलकुण्डालया कौलमार्ग-तत्पर-सेविता॥ ९३॥
कुमार-गणनाथाम्बा तुष्टिः पुष्टिर्-मतिर्-धृतिः।
शान्तिः स्वस्तिमती कान्तिर्-नन्दिनी विघ्ननाशिनी॥ ९४॥
तेजोवती त्रिनयना लोलाक्षि-कामरूपिणी।
मालिनी हंसिनी माता मलयाचल-वासिनी॥ ९५॥
सुमुखी नलिनी सुभ्रूः शोभना सुरनायिका।
कालकण्ठी कान्तिमति क्षोभिणी सूक्ष्मरूपिणी॥ ९६॥
वज्रेश्वरी वामदेवी वयोऽवस्था-विवर्जिता।
सिद्धेश्वरि सिद्धविद्या सिद्धमाता यशस्विनी॥ ९७॥
विशुद्धि-चक्र-निलया-ऽऽरक्तवर्णा त्रिलोचना।
खट्वाङ्गादि-प्रहरणा वदनैक-समन्विता॥ ९८॥
पायसान्न-प्रिया त्वक्स्था पशुलोक-भयंकरी।
अमृतादि-महाशक्ति-संवृता डाकिनीश्वरी॥ ९९॥
अनाहताब्ज-निलया श्यामाभा वदनद्वया।
दंष्ट्रोज्ज्वला-ऽक्षमालादिधरा रुधिरसंस्थिता॥ १००॥
कालरात्र्यादि-शक्त्यौघवृता स्निग्धौदनप्रिया।
महावीरेन्द्र-वरदा राकिण्यम्बा-स्वरूपिणी॥ १०१॥
मणिपूराब्ज-निलया वदनत्रय-संयुता।
वज्रादिकायुधोपेता डामर्यादिभि-रावृता॥ १०२॥
रक्तवर्णा मांसनिष्ठा गुडान्न-प्रीत-मानसा।
समस्त-भक्तसुखदा लाकिन्यंबा-स्वरूपिणी॥ १०३॥
स्वाधिष्ठानांबुजगता चतुर्वक्त्र-मनोहरा।
शूलाद्यायुध-संपन्ना पीतवर्णा-ऽतिगर्विता॥ १०४॥
मेदोनिष्ठा मधुप्रीता बन्दिन्यादि-समन्विता।
दध्यन्नासक्त-हृदया काकिनीरूप-धारिणी॥ १०५॥
मूलाधाराम्बुजारूढा पञ्चवक्त्रा-ऽस्थिसंस्थिता।
अङ्कुशादि-प्रहरणा वरदादि-निषेविता॥ १०६॥
मुद्गौदनासक्त-चित्ता साकिन्यम्बा-स्वरूपिणी।
आज्ञा-चक्राब्ज-निलया शुक्लवर्णा षडानना॥ १०७॥
मज्जा-संस्था हंसवती-मुख्यशक्ति-समन्विता।
हरिद्रान्नैक-रसिका हाकिनी-रूपधारिणी॥ १०८॥
सहस्रदल-पद्मस्था सर्व-वर्णोप-शोभिता।
सर्वायुध-धरा शुक्ल-संस्थिता सर्वतोमुखी॥ १०९॥
सर्वौदन-प्रीतचित्ता याकिन्यम्बा-स्वरूपिणी।
स्वाहा स्वधा-ऽमतिर्मेधा श्रुतिः स्मृति-रनुत्तमा॥ ११०॥
पुण्यकीर्तिः पुण्यलभ्या पुण्य-श्रवण-कीर्तना।
पुलोमजार्चिता बन्धमोचनी बर्बरालका॥ १११॥
विमर्श-रूपिणी विद्या वियदादि-जगत्प्रसूः।
सर्व-व्याधि-प्रशमनी सर्व-मृत्यु निवारिणी॥ ११२॥
अग्रगण्या-ऽचिन्त्यरूपा कलिकल्मष-नाशिनी।
कात्यायनी कालहन्त्री कमलाक्ष-निषेविता॥ ११३॥
ताम्बूल-पूरित-मुखी दाडिमी-कुसुम-प्रभा।
मृगाक्षी मोहिनी मुख्या मृडानी मित्ररूपिणी॥ ११४॥
नित्य-तृप्ता भक्तनिधिः नियन्त्री निखिलेश्वरी।
मैत्र्यादि-वासनालभ्या महाप्रलय-साक्षिणी॥ ११५॥
पराशक्तिः परानिष्ठा प्रज्ञानघन-रुपिणी।
माध्वी-पानालसा मत्ता मातृका-वर्णरूपिणी॥ ११६॥
महाकैलास-निलया मृणाल-मृदु दोर्लता।
महनीया दयामूर्तिः महासांराज्य-शालिनी॥ ११७॥
आत्मविद्या महाविद्या श्रीविद्या कामसेविता।
श्रीषोडशाक्षरी-विद्या त्रिकूटा कामकोटिका॥ ११८॥
कटाक्षकिङ्करी-भूत-कमलाकोटि-सेविता।
शिरःस्थिता चन्द्रनिभा भालस्थेन्द्र-धनुःप्रभा॥ ११९॥
हृदयस्था रविप्रख्या त्रिकोणान्तर-दीपिका।
दाक्षायणी दैत्यहन्त्री दक्षयज्ञविनाशिनी॥ १२०॥
दरान्दोलित-दीर्घाक्षी दरहासोज्ज्वलन्मुखी।
गुरुमूर्तिर्-गुणनिधिर्-गोमाता गुहजन्म-भूः॥ १२१॥
देवेशी दण्डनीतिस्था दहराकाश-रूपिणी।
प्रतिपन्-मुख्य-राकान्त-तिथि-मण्डल-पूजिता॥ १२२॥
कलात्मिका कलानाथा काव्यालाप-विनोदिनी।
स-चामर-रमा-वाणी-सव्य-दक्षिण-सेविता॥ १२३॥
आदिशक्ति-रमेयाऽऽत्मा परमा पावनाकृतिः।
अनेककोटि-ब्रह्माण्ड-जननी दिव्य-विग्रहा॥ १२४॥
क्लींकारी केवला गुह्या कैवल्यपद-दायिनी।
त्रिपुरा त्रिजगद्-वन्द्या त्रिमूर्तिस्-त्रिदशेश्वरी॥ १२५॥
त्र्यक्षरि दिव्यगन्धाढ्या सिन्दूर-तिलकाञ्चिता।
उमा शैलेन्द्र-तनया गौरी गन्धर्व-सेविता॥ १२६॥
विश्वगर्भा स्वर्णगर्भा-ऽवरदा वागधीश्वरी।
ध्यानगम्या-ऽपरिच्छेद्या ज्ञानदा ज्ञानविग्रहा॥ १२७॥
सर्व-वेदान्त-संवेद्या सत्यानन्द-स्वरूपिणी।
लोपामुद्रार्चिता लीलाकॢप्त-ब्रह्माण्ड-मण्डला॥ १२८॥
अदृश्या दृश्य-रहिता विज्ञात्री वेद्यवर्जिता।
योगिनी योगदा योग्या योगानन्दा युगंधरा॥ १२९॥
इच्छाशक्ति-ज्ञानशक्ति-क्रियाशक्ति-स्वरूपिणी।
सर्वाधारा सुप्रतिष्ठा सदसद्रूप-धारिणी॥ १३०॥
अष्टमूर्ति-रजाजैत्री लोकायात्रा-विधायिनी।
एकाकिनी भूमरूपा निर्द्वैता द्वैत-वर्जिता॥ १३१॥
अन्नदा वसुदा वृद्धा ब्रह्मात्मैक्य-स्वरूपिणी।
बृहती ब्राह्मणी ब्राह्मी ब्रह्मानन्दा बलिप्रिया॥ १३२॥
भाषारूपा बृहत्सेना भावाभाव-विवर्जिता।
सुखाराध्या शुभकरी शोभना-सुलभागतिः॥ १३३॥
राजराजेश्वरी राज्यदायिनी राज्यवल्लभा।
राजत्कृपा राजपीठ-निवेशित-निजाश्रिता॥ १३४॥
राज्यलक्ष्मीः कोशनाथा चतुरङ्ग-बलेश्वरी।
साम्राज्यदायिनी सत्यसंधा सागरमेखला॥ १३५॥
दीक्षिता दैत्यशमनी सर्वलोक-वशंकरी।
सर्वार्थदात्री सावित्री सच्चिदानन्द-रूपिणी॥ १३६॥
देशकालापरिच्छिन्ना सर्वगा सर्वमोहिनी।
सरस्वती शास्त्रमयी गुहाम्बा गुह्यरूपिणी॥ १३७॥
सर्वोपाधि-विनिर्मुक्ता सदाशिव-पतिव्रता।
संप्रदायेश्वरी साध्वी गुरूमण्डल-रूपिणी॥ १३८॥
कुलोत्तीर्णा भगाराध्या माया मधुमती मही।
गणाम्बा गुह्यकाराध्या कोमलाङ्गी गुरुप्रिया॥ १३९॥
स्वतन्त्रा सर्वतन्त्रेशी दक्षिणामूर्ति-रूपिणी।
सनकादि-समाराध्या शिवज्ञान-प्रदायिनी॥ १४०॥
चित्कला-ऽऽनन्दकलिका प्रेमरूपा प्रियंकरी।
नामपारायण-प्रीता नन्दिविद्या नटेश्वरी॥ १४१॥
मिथ्या-जगदधिष्ठाना मुक्तिदा मुक्तिरूपिणी।
लास्यप्रिया लयकरी लज्जा रम्भादिवन्दिता॥ १४२॥
भवदाव-सुधावृष्टिः पापारण्य-दवानला।
दौर्भाग्य-तूलवातूला जराध्वान्तरविप्रभा॥ १४३॥
भाग्याब्धि-चन्द्रिका भक्तचित्त-केकि-घनाघना।
रोगपर्वत-दंभोलिः मृत्युदारु-कुठारिका॥ १४४॥
महेश्वरी महाकाळी महाग्रासा महाशना।
अपर्णा चण्डिका चण्ड-मुण्डासुर-निषूदिनी॥ १४५॥
क्षराक्षरात्मिका सर्वलोकेशी विश्वधारिणी।
त्रिवर्गदात्री सुभगा त्र्यम्बका त्रिगुणात्मिका॥ १४६॥
स्वर्गापवर्गदा शुद्ध जपापुष्प-निभाकृतिः।
ओजोवती द्युतिधरा यज्ञरूपा प्रियव्रता॥ १४७॥
दुराराध्या दुराधर्षा पाटलीकुसुमप्रिया।
महती मेरुनिलया मन्दारकुसुमप्रिया॥ १४८॥
वीराराध्या विराड्रूपा विरजा विश्वतोमुखी।
प्रत्यग्रूपा पराकाशा प्राणदा प्राणरूपिणी॥ १४९॥
मार्तण्ड-भैरवाराध्या मन्त्रिणी-न्यस्तराज्यधूः।
त्रिपुरेशी जयत्सेना निस्त्रैगुण्या परापरा॥ १५०॥
सत्यज्ञानानन्दरूपा सामरस्य-परायणा।
कपर्दिनी कलामाला कामधुक् कामरूपिणी॥ १५१॥
कलानिधिः काव्यकला रसज्ञा रसशेवधिः।
पुष्टा पुरातना पूज्या पुष्करा पुष्करेक्षणा॥ १५२॥
परंज्योतिः परंधाम परमाणुः परात्परा।
पाशहस्ता पाशहन्त्री परमन्त्र-विभेदिनी॥ १५३॥
मुर्ता-ऽमूर्ता-ऽनित्यतृप्ता मुनिमानसहंसिका।
सत्यव्रता सत्यरूपा सर्वान्तर्यामिनी सती॥ १५४॥
ब्रह्माणी ब्रह्म-जननी बहुरूपा बुधार्चिता।
प्रसवित्री प्रचण्डा-ऽऽज्ञा प्रतिष्ठा प्रकटाकृतिः॥ १५५॥
प्राणेश्वरी प्राणदात्री पञ्चाशत्पीठ-रूपिणी।
विशृङ्खला विविक्तस्था वीरमाता वियत्प्रसूः॥ १५६॥
मुकुन्दा मुक्तिनिलया मूलविग्रह-रूपिणी।
भावज्ञा भवरोगघ्नी भवचक्र-प्रवर्तिनी॥ १५७॥
छन्दःसारा शास्त्रसारा मन्त्रसारा तलोदरी।
उदारकीर्तिः उद्दामवैभवा वर्णरूपिणी॥ १५८॥
जन्म-मृत्यु-जरातप्त-जन-विश्रान्ति-दायिनी।
सर्वोपनिष-दुद्घुष्टा शान्त्यतीत-कलात्मिका॥ १५९॥
गम्भीरा गगनान्तस्था गर्विता गानलोलुपा।
कल्पना-रहिता काष्ठा-ऽकान्ता कान्तार्ध-विग्रहा॥ १६०॥
कार्य-कारण-निर्मुक्ता कामकेलि-तरङ्गिता।
कनत्कनक-ताटङ्का लीलाविग्रह-धारिणी॥ १६१॥
अजा क्षयविनिर्मुक्ता मुग्धा क्षिप्र-प्रसादिनी।
अन्तर्मुख-समाराध्या बहिर्मुख-सुदुर्लभा॥ १६२॥
त्रयी त्रिवर्ग-निलया त्रिस्था त्रिपुरमालिनी।
निरामया निरालम्बा स्वात्मारामा सुधास्रुतिः॥ १६३॥
संसारपङ्क-निर्मग्न-समुद्धरण-पण्डिता।
यज्ञप्रिया यज्ञकर्त्री यजमान-स्वरूपिणी॥ १६४॥
धर्माधारा धनाध्यक्षा धनधान्य-विवर्धिनी।
विप्रप्रिया विप्ररूपा विश्वभ्रमण-कारिणी॥ १६५॥
विश्वग्रासा विद्रुमाभा वैष्णवी विष्णुरूपिणी।
अयोनिर्-योनिनिलया कूटस्था कुलरूपिणी॥ १६६॥
वीरगोष्ठीप्रिया वीरा नैष्कर्म्या नादरूपिणी।
विज्ञानकलना कल्या विदग्धा बैन्दवासना॥ १६७॥
तत्त्वाधिका तत्त्वमयी तत्त्वमर्थ-स्वरूपिणी।
सामगानप्रिया सौम्या सदाशिव-कुटुम्बिनी॥ १६८॥
सव्यापसव्य-मार्गस्था सर्वापद्-विनिवारिणी।
स्वस्था स्वभावमधुरा धीरा धीरसमर्चिता॥ १६९॥
चैतन्यार्घ्य-समाराध्या चैतन्य-कुसुमप्रिया।
सदोदिता सदातुष्टा तरुणादित्य-पाटला॥ १७०॥
दक्षिणा-दक्षिणाराध्या दरस्मेर-मुखांबुजा।
कौलिनी-केवला-ऽनर्घ्य-कैवल्यपद-दायिनी॥ १७१॥
स्तोत्रप्रिया स्तुतिमती श्रुति-संस्तुत-वैभवा।
मनस्विनी मानवती महेशी मंगलाकृतिः॥ १७२॥
विश्वमाता जगद्धात्री विशालाक्षी विरागिणी।
प्रगल्भा परमोदारा परामोदा मनोमयी॥ १७३॥
व्योमकेशी विमानस्था वज्रिणी वामकेश्वरी।
पञ्चयज्ञप्रिया पञ्चप्रेत-मञ्चाधिशायिनी॥ १७४॥
पञ्चमी पञ्चभूतेशि पञ्चसंख्योपचारिणी।
शाश्वती शाश्वतैश्वर्या शर्मदा शंभुमोहिनी॥ १७५॥
धरा धरसुता धन्या धर्मिणी धर्मवर्धिनी।
लोकातीता गुणातीता सर्वातीता शमात्मिका॥ १७६॥
बन्धूक-कुसुम-प्रख्या बाला लीलाविनोदिनी।
सुमङ्गली सुखकरी सुवेषाढ्या सुवासिनी॥ १७७॥
सुवासिन्यर्चन-प्रीता शोभना शुद्धमानसा।
बिन्दुतर्पण-संतुष्टा पूर्वजा त्रिपुरांबिका॥ १७८॥
दशमुद्रा-समाराध्या त्रिपुराश्रीवशंकरी।
ज्ञानमुद्रा ज्ञानगम्या ज्ञानज्ञेय-स्वरूपिणी॥ १७९॥
योनिमुद्रा त्रिखण्डेशी त्रिगुणांबा त्रिकोणगा।
अनघा-ऽद्भुतचारित्रा वाञ्छितार्थ-प्रदायिनी॥ १८०॥
अभ्यासातिशय-ज्ञाता षडध्वातीत-रूपिणी।
अव्याज-करुणामूर्ति-रज्ञान-ध्वान्त-दीपिका॥ १८१॥
आबालगोप-विदिता सर्वानुल्लंघ्य-शासना।
श्रीचक्रराज-निलया श्रीमत् त्रिपुरसुन्दरी॥ १८२॥
श्रीशिवा शिवशक्त्यैक्य-रूपिणी ललिताम्बिका॥ ॐ॥
एवं श्रीललितादेव्या नाम्नां साहस्रकं जगुः
॥ इति श्री ब्रह्माण्डपुराणे उत्तरखण्डे
श्री हयग्रीवागस्त्यसंवादे
श्रीललितासहस्रनाम स्तोत्र कथनं संपूर्णं॥
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Dyanam
Parayanam
ध्यानम्
सिन्दूरारुण-विग्रहां त्रिनयनां माणिक्य-मौलिस्फुरत्
तारानायक-शेखरां स्मितमुखी-मापीन वक्षोरुहाम्।
पाणिभ्या-मलिपूर्ण-रत्नचषकं रक्तोत्पलं विभ्रतीं
सौम्यां रत्नघटस्थ-रक्तचरणां ध्यायेत्-परामम्बिकाम्॥
अरुणां करुणा तरङ्गिताक्षीं
धृत-पाशाङ्कुश-पुष्प-बाण-चापाम्।
अणिमादिभि-रावृतां मयुखैः
अहमित्येव विभावये भवानीम्॥
ध्यायेत् पद्मासनस्थां विकसित-वदनां पद्मपत्रायताक्षीं
हेमाभां पीतवस्त्रां करकलित-लसद्धेम-पद्मां वराङ्गीम्।
सर्वालङ्कारयुक्तां सततमभयदां भक्तनम्रां भवानीं
श्रीविद्यां शान्तमूर्तिं सकलसुरनुतां सर्वसम्पत्-प्रदात्रीम्॥
सकुङ्कुम-विलेपना-मळिकचुम्बि कस्तूरिकां
समन्द-हसितेक्षणां स-शर-चाप-पाशाङ्कुशाम्।
अशेषजन मोहिनीं अरुण माल्य-भूषाम्बरां
जपाकुसुम भासुरां जपविधौ स्मरे-दम्बिकाम्॥
अथ श्रीललितासहस्रनाम स्तोत्रम्
ॐ श्रीमाता श्रीमहाराज्ञी श्रीमत्-सिंहासनेश्वरी।
चिदग्नि-कुण्ड-संभूता देवकार्य-समुद्यता॥ १॥
उद्यद्भानु-सहस्राभा चतुर्बाहु-समन्विता।
रागस्वरूप-पाशाढ्या क्रोधाकाराङ्कुशोज्ज्वला॥ २॥
मनोरूपेक्षु-कोदण्डा पञ्च-तन्मात्र-सायका।
निजारुण-प्रभापूर-मज्जद्-ब्रह्माण्ड-मण्डला॥ ३॥
चम्पकाऽशोक-पुन्नाग-सौगन्धिक-लसत्कचा।
कुरुविन्दमणि-श्रेणी-कनत्कोटीर-मण्डिता॥ ४॥
अष्टमीचन्द्र-विभ्राज-दलिकस्थल-शोभिता।
मुखचन्द्र-कलङ्काभ-मृगनाभि-विशेषका॥ ५॥
वदनस्मर-माङ्गल्य-गृहतोरण-चिल्लिका।
वक्त्र-लक्ष्मी-परीवाह-चलन्मीनाभलोचना॥ ६॥
नवचम्पक-पुष्पाभ-नासादण्ड-विराजिता।
ताराकान्ति-तिरस्कारि-नासाभरण-भासुरा॥ ७॥
कदम्ब-मञ्जरीकॢप्त-कर्णपूर-मनोहरा।
ताटङ्कयुगलीभूत तपनोडुप-मण्डला॥ ८॥
पद्मराग-शिलादर्श परिभावि-कपोलभूः।
नवविद्रुम-बिम्बश्री-न्यक्कारि-रदनच्छदा॥ ९॥
शुद्ध-विद्याङ्कुराकार-द्विजपङ्क्ति-द्वयोज्ज्वला।
कर्पूर-वीटिकामोद-समाकर्षद्-दिगन्तरा॥ १०॥
निजसल्लाप-माधुर्य-विनिर्भर्त्सित-कच्छपी।
मन्दस्मित-प्रभापूर-मज्जत्-कामेश-मानसा॥ ११॥
अनाकलित-सादृश्य-चिबुकश्री-विराजिता।
कामेश-बद्ध-माङ्गल्यसूत्र-शोभित-कंधरा॥ १२॥
कनकाङ्गद-केयूर-कमनीय-भुजान्विता।
रत्नग्रैवेय-चिन्ताक-लोल-मुक्ता-फलान्विता॥ १३॥
कामेश्वर-प्रेमरत्न-मणि-प्रतिपण-स्तनी।
नाभ्यालवाल-रोमालि-लता-फल-कुचद्वयी॥ १४॥
लक्ष्यरोम-लताधारता-समुन्नेय-मध्यमा।
स्तनभार-दलन्-मध्य-पट्टबन्ध-वलित्रया॥ १५॥
अरुणारुण कौसुम्भ-वस्त्र-भास्वत्-कटीतटी।
रत्न-किङ्किणिकारम्य-रशना-दाम-भूषिता॥ १६॥
कामेश-ज्ञात-सौभाग्य-मार्दवोरु-द्वयान्विता।
माणिक्य-मकुटाकार-जानुद्वय-विराजिता॥ १७॥
इन्द्रगोप-परिक्षिप्त-स्मरतूणाभ-जंघिका।
गूढगुल्फा कूर्मपृष्ठ-जयिष्णु-प्रपदान्विता॥ १८॥
नखदीधिति-संछन्न-नमज्जन-तमोगुणा।
पदद्वय-प्रभाजाल-पराकृत-सरोरुहा॥ १९॥
सिञ्जान-मणिमञ्जीर-मण्डित-श्री-पदाम्बुजा।
मराली-मन्दगमना महालावण्य-शेवधिः॥ २०॥
सर्वारुणा-ऽनवद्याङ्गी सर्वाभरण-भूषिता।
शिव-कामेश्वराङ्कस्था शिवा स्वाधीन-वल्लभा॥ २१॥
सुमेरु-मध्यशृङ्गस्था श्रीमन्नगर-नायिका।
चिन्तामणि-गृहान्तस्था पञ्च-ब्रह्मासनस्थिता॥ २२॥
महापद्माटवी-संस्था कदम्बवन-वासिनी।
सुधासागर-मध्यस्था कामाक्षी कामदायिनी॥ २३॥
देवर्षिगण-संघात-स्तूयमानात्म-वैभवा।
भण्डासुर-वधोद्युक्त-शक्तिसेना-समन्विता॥ २४॥
सम्पत्करी-समारूढ-सिंधुर-व्रजसेविता।
अश्वारूढा-ऽधिष्ठिताश्व-कोटि-कोटिभि-रावृता॥ २५॥
चक्रराज-रथारूढ-सर्वायुध-परिष्कृता।
गेयचक्र-रथारूढ-मन्त्रिणी-परिसेविता॥ २६॥
किरिचक्र-रथारूढ दण्डनाथा-पुरस्कृता।
ज्वालामालिनिकाक्षिप्त-वह्निप्राकार-मध्यगा॥ २७॥
भण्डसैन्य-वधोद्युक्त-शक्तिविक्रम-हर्षिता।
नित्या पराक्रमाटोप-निरीक्षण-समुत्सुका॥ २८॥
भण्डपुत्र-वधोद्युक्त-बाला-विक्रम-नन्दिता।
मन्त्रिण्यम्बा-विरचित-विषङ्गवध-तोषिता॥ २९॥
विशुक्र-प्राणहरण-वाराही-वीर्य-नन्दिता।
कामेश्वर-मुखालोक-कल्पित-श्रीगणेश्वरा॥ ३०॥
महागणेश-निर्भिन्न-विघ्नयन्त्र-प्रहर्षिता।
भण्डासुरेन्द्र-निर्मुक्त-शस्त्र-प्रत्यस्त्र-वर्षिणी॥ ३१॥
कराङ्गुलि-नखोत्पन्न-नारायण-दशाकृतिः।
महा-पाशुपतास्त्राग्नि-निर्दग्धासुर-सैनिका॥ ३२॥
कामेश्वरास्त्र-निर्दग्ध-सभण्डासुर-शून्यका।
ब्रह्मोपेन्द्र-महेन्द्रादि-देवसंस्तुत-वैभवा॥ ३३॥
हरनेत्राग्नि-संदग्ध-कामसंजीवनौषधिः।
श्रीमद्-वाग्भवकूटैक-स्वरूप-मुखपङ्कजा॥ ३४॥
कण्ठाधः-कटिपर्यन्त-मध्यकूट-स्वरूपिणी।
शक्तिकूटैकतापन्न-कट्यधो-भागधारिणी॥ ३५॥
मुलमन्त्रात्मिका मूलकूटत्रय-कलेबरा।
कुलामृतैक-रसिका कुलसंकेत-पालिनी॥ ३६॥
कुलाङ्गना कुलान्तस्था कौलिनी कुलयोगिनी।
अकुला समयान्तस्था समयाचार-तत्परा॥ ३७॥
मूलाधारैक-निलया ब्रह्मग्रन्थि-विभेदिनी।
मणिपूरान्तरुदिता विष्णुग्रन्थि-विभेदिनी॥ ३८॥
आज्ञा-चक्रान्तरालस्था रुद्रग्रन्थि-विभेदिनी।
सहस्राराम्बुजारूढा सुधासाराभि-वर्षिणी॥ ३९॥
तडिल्लता-समरुचिः षट्चक्रोपरि-संस्थिता।
महासक्तिः कुण्डलिनी बिसतन्तु-तनीयसी॥ ४०॥
भवानी भावनागम्या भवारण्य-कुठारिका।
भद्रप्रिया भद्रमूर्तिः भक्त-सौभाग्य-दायिनी॥ ४१॥
भक्तिप्रिया भक्तिगम्या भक्तिवश्या भयापहा।
शांभवी शारदाराध्या शर्वाणी शर्मदायिनी॥ ४२॥
शांकरी श्रीकरी साध्वी शरच्चन्द्र-निभानना।
शातोदरी शान्तिमती निराधारा निरंजना॥ ४३॥
निर्लेपा निर्मला नित्या निराकरा निराकुला।
निर्गुणा निष्कला शान्ता निष्कामा निरुपप्लवा॥ ४४॥
नित्यमुक्ता निर्विकारा निष्प्रपञ्चा निराश्रया।
नित्यशुद्धा नित्यबुद्धा निरवद्या निरन्तरा॥ ४५॥
निष्कारणा निष्कलङ्का निरुपाधिः निरीश्वरा।
नीरागा रागमथनी निर्मदा मदनाशिनी॥ ४६॥
निश्चिन्ता निरहंकारा निर्मोहा मोहनाशिनी।
निर्ममा ममताहन्त्री निष्पापा पापनाशिनी॥ ४७॥
निष्क्रोधा क्रोधशमनी निर्लोभा लोभनाशिनी।
निःसंशया संशयघ्नी निर्भवा भवनाशिनी॥ ४८॥
निर्विकल्पा निराबाधा निर्भेदा भेदनाशिनी।
निर्नाशा मृत्युमथनी निष्क्रिया निष्परिग्रहा॥ ४९॥
निस्तुला नीलचिकुरा निरपाया निरत्यया।
दुर्लभा दुर्गमा दुर्गा दुःखहन्त्री सुखप्रदा॥ ५०॥
दुष्टदूरा दुराचार-शमनी दोषवर्जिता।
सर्वज्ञा सान्द्रकरुणा समानाधिक-वर्जिता॥ ५१॥
सर्वशक्तिमयी सर्वमङ्गला सद्गतिप्रदा।
सर्वेश्वरि सर्वमयी सर्वमन्त्र-स्वरूपिणी॥ ५२॥
सर्वयन्त्रात्मिका सर्वतन्त्ररूपा मनोन्मनी।
माहेश्वरी महादेवी महालक्ष्मी मृडप्रिया॥ ५३॥
महारूपा महापूज्या महापातक-नाशिनी।
महामाया महासत्त्वा महाशक्तिः महारतिः॥ ५४॥
महाभोगा महैश्वर्या महावीर्या महाबला।
महाबुद्धिः महासिद्धिः महायोगेश्वरेश्वरी॥ ५५॥
महातन्त्रा महामन्त्रा महायन्त्रा महासना।
महायाग-क्रमाराध्या महाभैरवपूजिता॥ ५६॥
महेश्वर महाकल्प महाताण्डव-साक्षिणी।
महाकामेश-महिषी महात्रिपुरसुन्दरी॥ ५७॥
चतुष्षष्ट्-युपचाराढ्या चतुष्षष्टि-कलामयी।
महाचतुष्षष्टिकोटि-योगिनीगण-सेविता॥ ५८॥
मनुविद्या चन्द्रविद्या चन्द्र-मण्डल-मध्यगा।
चारुरूपा चारुहासा चारुचन्द्र-कलाधरा॥ ५९॥
चराचर-जगन्नाथा चक्रराज-निकेतना।
पार्वती पद्मनयना पद्मराग-समप्रभा॥ ६०॥
पञ्चप्रेतासनासीना पञ्चब्रह्म-स्वरुपिणी।
चिन्मयी परमानन्दा विज्ञान-घनरूपिणी॥ ६१॥
ध्यान-ध्यातृ-ध्येयरूपा धर्माऽधर्म-विवर्जिता।
विश्वरुपा जागरिणी स्वपन्ती तैजसात्मिका॥ ६२॥
सुप्ता प्राज्ञात्मिका तुर्या सर्वावस्था-विवर्जिता।
सृष्टिकर्त्री ब्रह्मरूपा गोप्त्री गोविन्दरूपिणी॥ ६३॥
संहारिणी रुद्ररूपा तिरोधानकरीश्वरी।
सदाशिवा-ऽनुग्रहदा पञ्चकृत्य-परायणा॥ ६४॥
भानुमण्डल-मध्यस्था भैरवी भगमालिनी।
पद्मासना भगवती पद्मनाभ-सहोदरी॥ ६५॥
उन्मेष-निमिषोत्पन्न-विपन्न-भुवनावली।
सहस्रशीर्ष-वदना सहस्राक्षी सहस्रपात्॥ ६६॥
आब्रह्म-कीट-जननी वर्णाश्रम-विधायिनि।
निजाज्ञारूप-निगमा पुण्याऽपुण्य-फलप्रदा॥ ६७॥
श्रुति-सीमन्त-सिन्दूरी-कृत-पादाब्जधूलिका।
सकलागम-संदोह-शुक्ति-संपुट-मौक्तिका॥ ६८॥
पुरुषार्थ-प्रदा पूर्णा भोगिनी भुवनेश्वरी।
अंबिका-ऽनादिनिधना हरिब्रह्मेन्द्र-सेविता॥ ६९॥
नारायणी नादरूपा नामरूप-विवर्जिता।
ह्रींकारी ह्रीमती हृद्या हेयोपादेय-वर्जिता॥ ७०॥
राजराजार्चिता राज्ञी रम्या राजीवलोचना।
रंजनी रमणी रस्या रणत्किङ्किणि-मेखला॥ ७१॥
रमा राकेन्दु-वदना रतिरूपा रतिप्रिया।
रक्षाकरी राक्षसघ्नी रामा रमणलम्पटा॥ ७२॥
काम्या कामकलारूपा कदम्बकुसुमप्रिया।
कल्याणी जगती-कन्दा करुणारस-सागरा॥ ७३॥
कलावती कलालापा कान्ता कादम्बरी-प्रिया।
वरदा वामनयना वारुणी-मद-विह्वला॥ ७४॥
विश्वाधिका वेदवेद्या विन्ध्याचल-निवासिनी।
विधात्री वेदजननी विष्णुमाया विलासिनी॥ ७५॥
क्षेत्र-स्वरूपा क्षेत्रेशी क्षेत्रक्षेत्रज्ञ-पालिनी।
क्षयवृद्धि-विनिर्मुक्ता क्षेत्रपाल-समर्चिता॥ ७६॥
विजया विमला वन्द्या वन्दारु-जन-वत्सला।
वाग्वादिनी वामकेशी वह्निमण्डल-वासिनी॥ ७७॥
भक्तिमत्-कल्पलतिका पशुपाश-विमोचिनी।
संहृताशेष-पाषण्डा सदाचार-प्रवर्तिका॥ ७८॥
तापत्रयाग्नि-संतप्त समाह्लादन-चन्द्रिका।
तरुणी तापसाराध्या तनुमध्या तमोपहा॥ ७९॥
चितिस्-तत्पद-लक्ष्यार्था चिदेकरस-रूपिणी।
स्वात्मानन्द-लवीभूत-ब्रह्माद्यानन्द-संततिः॥ ८०॥
परा प्रत्यक्-चिती-रूपा पश्यन्ती परदेवता।
मध्यमा वैखरी-रूपा भक्त-मानस-हंसिका॥ ८१॥
कामेश्वर-प्राणनाडी कृतज्ञा कामपूजिता।
शृङ्गार-रस-संपूर्णा जया जालन्धर-स्थिता॥ ८२॥
ओड्याण-पीठ-निलया बिन्दुमण्डल-वासिनी।
रहो-यागक्रमाराध्या रहस्तर्पण-तर्पिता॥ ८३॥
सद्यः प्रसादिनी विश्वसाक्षिणी साक्षिवर्जिता।
षडङ्ग-देवतायुक्ता षाड्गुण्य-परिपूरिता॥ ८४॥
नित्यक्लिन्ना निरुपमा निर्वाणसुखदायिनी।
नित्या-षोडशिकारूपा श्रीकण्ठार्ध-शरीरिणी॥ ८५॥
प्रभावती प्रभारूपा प्रसिद्धा परमेश्वरी।
मूलप्रकृति-रव्यक्ता व्यक्ताऽव्यक्त-स्वरूपीणि॥ ८६॥
व्यापिनी विविधाकारा विद्याऽविद्या-स्वरूपिणी।
महाकामेश-नयन-कुमुदाह्लाद-कौमुदी॥ ८७॥
भक्तहार्द-तमोभेद-भानुमद्भानुसन्ततिः।
शिवदूती शिवाराध्या शिवमूर्तिः शिवंकरी॥ ८८॥
शिवप्रिया शिवपरा शिष्टेष्टा शिष्टपूजिता।
अप्रमेया स्वप्रकाशा मनोवाचामगोचरा॥ ८९॥
चिच्छक्तिश्-चेतना-रूपा जडशक्तिर्-जडात्मिका।
गायत्री व्याहृतिः संध्या द्विजबृन्द-निषेविता॥ ९०॥
तत्वासना तत्त्वमयी पञ्चकोशान्तर-स्थिता।
निःसीम-महिमा नित्य-यौवना मदशालिनी॥ ९१॥
मदघूर्णित-रक्ताक्षी मदपाटल-गण्डभूः।
चन्दन-द्रव-दिग्धाङ्गी चाम्पेय-कुसुमप्रिया॥ ९२॥
कुशला कोमलाकारा कुरुकुल्ला कुलेश्वरी।
कुलकुण्डालया कौलमार्ग-तत्पर-सेविता॥ ९३॥
कुमार-गणनाथाम्बा तुष्टिः पुष्टिर्-मतिर्-धृतिः।
शान्तिः स्वस्तिमती कान्तिर्-नन्दिनी विघ्ननाशिनी॥ ९४॥
तेजोवती त्रिनयना लोलाक्षि-कामरूपिणी।
मालिनी हंसिनी माता मलयाचल-वासिनी॥ ९५॥
सुमुखी नलिनी सुभ्रूः शोभना सुरनायिका।
कालकण्ठी कान्तिमति क्षोभिणी सूक्ष्मरूपिणी॥ ९६॥
वज्रेश्वरी वामदेवी वयोऽवस्था-विवर्जिता।
सिद्धेश्वरि सिद्धविद्या सिद्धमाता यशस्विनी॥ ९७॥
विशुद्धि-चक्र-निलया-ऽऽरक्तवर्णा त्रिलोचना।
खट्वाङ्गादि-प्रहरणा वदनैक-समन्विता॥ ९८॥
पायसान्न-प्रिया त्वक्स्था पशुलोक-भयंकरी।
अमृतादि-महाशक्ति-संवृता डाकिनीश्वरी॥ ९९॥
अनाहताब्ज-निलया श्यामाभा वदनद्वया।
दंष्ट्रोज्ज्वला-ऽक्षमालादिधरा रुधिरसंस्थिता॥ १००॥
कालरात्र्यादि-शक्त्यौघवृता स्निग्धौदनप्रिया।
महावीरेन्द्र-वरदा राकिण्यम्बा-स्वरूपिणी॥ १०१॥
मणिपूराब्ज-निलया वदनत्रय-संयुता।
वज्रादिकायुधोपेता डामर्यादिभि-रावृता॥ १०२॥
रक्तवर्णा मांसनिष्ठा गुडान्न-प्रीत-मानसा।
समस्त-भक्तसुखदा लाकिन्यंबा-स्वरूपिणी॥ १०३॥
स्वाधिष्ठानांबुजगता चतुर्वक्त्र-मनोहरा।
शूलाद्यायुध-संपन्ना पीतवर्णा-ऽतिगर्विता॥ १०४॥
मेदोनिष्ठा मधुप्रीता बन्दिन्यादि-समन्विता।
दध्यन्नासक्त-हृदया काकिनीरूप-धारिणी॥ १०५॥
मूलाधाराम्बुजारूढा पञ्चवक्त्रा-ऽस्थिसंस्थिता।
अङ्कुशादि-प्रहरणा वरदादि-निषेविता॥ १०६॥
मुद्गौदनासक्त-चित्ता साकिन्यम्बा-स्वरूपिणी।
आज्ञा-चक्राब्ज-निलया शुक्लवर्णा षडानना॥ १०७॥
मज्जा-संस्था हंसवती-मुख्यशक्ति-समन्विता।
हरिद्रान्नैक-रसिका हाकिनी-रूपधारिणी॥ १०८॥
सहस्रदल-पद्मस्था सर्व-वर्णोप-शोभिता।
सर्वायुध-धरा शुक्ल-संस्थिता सर्वतोमुखी॥ १०९॥
सर्वौदन-प्रीतचित्ता याकिन्यम्बा-स्वरूपिणी।
स्वाहा स्वधा-ऽमतिर्मेधा श्रुतिः स्मृति-रनुत्तमा॥ ११०॥
पुण्यकीर्तिः पुण्यलभ्या पुण्य-श्रवण-कीर्तना।
पुलोमजार्चिता बन्धमोचनी बर्बरालका॥ १११॥
विमर्श-रूपिणी विद्या वियदादि-जगत्प्रसूः।
सर्व-व्याधि-प्रशमनी सर्व-मृत्यु निवारिणी॥ ११२॥
अग्रगण्या-ऽचिन्त्यरूपा कलिकल्मष-नाशिनी।
कात्यायनी कालहन्त्री कमलाक्ष-निषेविता॥ ११३॥
ताम्बूल-पूरित-मुखी दाडिमी-कुसुम-प्रभा।
मृगाक्षी मोहिनी मुख्या मृडानी मित्ररूपिणी॥ ११४॥
नित्य-तृप्ता भक्तनिधिः नियन्त्री निखिलेश्वरी।
मैत्र्यादि-वासनालभ्या महाप्रलय-साक्षिणी॥ ११५॥
पराशक्तिः परानिष्ठा प्रज्ञानघन-रुपिणी।
माध्वी-पानालसा मत्ता मातृका-वर्णरूपिणी॥ ११६॥
महाकैलास-निलया मृणाल-मृदु दोर्लता।
महनीया दयामूर्तिः महासांराज्य-शालिनी॥ ११७॥
आत्मविद्या महाविद्या श्रीविद्या कामसेविता।
श्रीषोडशाक्षरी-विद्या त्रिकूटा कामकोटिका॥ ११८॥
कटाक्षकिङ्करी-भूत-कमलाकोटि-सेविता।
शिरःस्थिता चन्द्रनिभा भालस्थेन्द्र-धनुःप्रभा॥ ११९॥
हृदयस्था रविप्रख्या त्रिकोणान्तर-दीपिका।
दाक्षायणी दैत्यहन्त्री दक्षयज्ञविनाशिनी॥ १२०॥
दरान्दोलित-दीर्घाक्षी दरहासोज्ज्वलन्मुखी।
गुरुमूर्तिर्-गुणनिधिर्-गोमाता गुहजन्म-भूः॥ १२१॥
देवेशी दण्डनीतिस्था दहराकाश-रूपिणी।
प्रतिपन्-मुख्य-राकान्त-तिथि-मण्डल-पूजिता॥ १२२॥
कलात्मिका कलानाथा काव्यालाप-विनोदिनी।
स-चामर-रमा-वाणी-सव्य-दक्षिण-सेविता॥ १२३॥
आदिशक्ति-रमेयाऽऽत्मा परमा पावनाकृतिः।
अनेककोटि-ब्रह्माण्ड-जननी दिव्य-विग्रहा॥ १२४॥
क्लींकारी केवला गुह्या कैवल्यपद-दायिनी।
त्रिपुरा त्रिजगद्-वन्द्या त्रिमूर्तिस्-त्रिदशेश्वरी॥ १२५॥
त्र्यक्षरि दिव्यगन्धाढ्या सिन्दूर-तिलकाञ्चिता।
उमा शैलेन्द्र-तनया गौरी गन्धर्व-सेविता॥ १२६॥
विश्वगर्भा स्वर्णगर्भा-ऽवरदा वागधीश्वरी।
ध्यानगम्या-ऽपरिच्छेद्या ज्ञानदा ज्ञानविग्रहा॥ १२७॥
सर्व-वेदान्त-संवेद्या सत्यानन्द-स्वरूपिणी।
लोपामुद्रार्चिता लीलाकॢप्त-ब्रह्माण्ड-मण्डला॥ १२८॥
अदृश्या दृश्य-रहिता विज्ञात्री वेद्यवर्जिता।
योगिनी योगदा योग्या योगानन्दा युगंधरा॥ १२९॥
इच्छाशक्ति-ज्ञानशक्ति-क्रियाशक्ति-स्वरूपिणी।
सर्वाधारा सुप्रतिष्ठा सदसद्रूप-धारिणी॥ १३०॥
अष्टमूर्ति-रजाजैत्री लोकायात्रा-विधायिनी।
एकाकिनी भूमरूपा निर्द्वैता द्वैत-वर्जिता॥ १३१॥
अन्नदा वसुदा वृद्धा ब्रह्मात्मैक्य-स्वरूपिणी।
बृहती ब्राह्मणी ब्राह्मी ब्रह्मानन्दा बलिप्रिया॥ १३२॥
भाषारूपा बृहत्सेना भावाभाव-विवर्जिता।
सुखाराध्या शुभकरी शोभना-सुलभागतिः॥ १३३॥
राजराजेश्वरी राज्यदायिनी राज्यवल्लभा।
राजत्कृपा राजपीठ-निवेशित-निजाश्रिता॥ १३४॥
राज्यलक्ष्मीः कोशनाथा चतुरङ्ग-बलेश्वरी।
साम्राज्यदायिनी सत्यसंधा सागरमेखला॥ १३५॥
दीक्षिता दैत्यशमनी सर्वलोक-वशंकरी।
सर्वार्थदात्री सावित्री सच्चिदानन्द-रूपिणी॥ १३६॥
देशकालापरिच्छिन्ना सर्वगा सर्वमोहिनी।
सरस्वती शास्त्रमयी गुहाम्बा गुह्यरूपिणी॥ १३७॥
सर्वोपाधि-विनिर्मुक्ता सदाशिव-पतिव्रता।
संप्रदायेश्वरी साध्वी गुरूमण्डल-रूपिणी॥ १३८॥
कुलोत्तीर्णा भगाराध्या माया मधुमती मही।
गणाम्बा गुह्यकाराध्या कोमलाङ्गी गुरुप्रिया॥ १३९॥
स्वतन्त्रा सर्वतन्त्रेशी दक्षिणामूर्ति-रूपिणी।
सनकादि-समाराध्या शिवज्ञान-प्रदायिनी॥ १४०॥
चित्कला-ऽऽनन्दकलिका प्रेमरूपा प्रियंकरी।
नामपारायण-प्रीता नन्दिविद्या नटेश्वरी॥ १४१॥
मिथ्या-जगदधिष्ठाना मुक्तिदा मुक्तिरूपिणी।
लास्यप्रिया लयकरी लज्जा रम्भादिवन्दिता॥ १४२॥
भवदाव-सुधावृष्टिः पापारण्य-दवानला।
दौर्भाग्य-तूलवातूला जराध्वान्तरविप्रभा॥ १४३॥
भाग्याब्धि-चन्द्रिका भक्तचित्त-केकि-घनाघना।
रोगपर्वत-दंभोलिः मृत्युदारु-कुठारिका॥ १४४॥
महेश्वरी महाकाळी महाग्रासा महाशना।
अपर्णा चण्डिका चण्ड-मुण्डासुर-निषूदिनी॥ १४५॥
क्षराक्षरात्मिका सर्वलोकेशी विश्वधारिणी।
त्रिवर्गदात्री सुभगा त्र्यम्बका त्रिगुणात्मिका॥ १४६॥
स्वर्गापवर्गदा शुद्ध जपापुष्प-निभाकृतिः।
ओजोवती द्युतिधरा यज्ञरूपा प्रियव्रता॥ १४७॥
दुराराध्या दुराधर्षा पाटलीकुसुमप्रिया।
महती मेरुनिलया मन्दारकुसुमप्रिया॥ १४८॥
वीराराध्या विराड्रूपा विरजा विश्वतोमुखी।
प्रत्यग्रूपा पराकाशा प्राणदा प्राणरूपिणी॥ १४९॥
मार्तण्ड-भैरवाराध्या मन्त्रिणी-न्यस्तराज्यधूः।
त्रिपुरेशी जयत्सेना निस्त्रैगुण्या परापरा॥ १५०॥
सत्यज्ञानानन्दरूपा सामरस्य-परायणा।
कपर्दिनी कलामाला कामधुक् कामरूपिणी॥ १५१॥
कलानिधिः काव्यकला रसज्ञा रसशेवधिः।
पुष्टा पुरातना पूज्या पुष्करा पुष्करेक्षणा॥ १५२॥
परंज्योतिः परंधाम परमाणुः परात्परा।
पाशहस्ता पाशहन्त्री परमन्त्र-विभेदिनी॥ १५३॥
मुर्ता-ऽमूर्ता-ऽनित्यतृप्ता मुनिमानसहंसिका।
सत्यव्रता सत्यरूपा सर्वान्तर्यामिनी सती॥ १५४॥
ब्रह्माणी ब्रह्म-जननी बहुरूपा बुधार्चिता।
प्रसवित्री प्रचण्डा-ऽऽज्ञा प्रतिष्ठा प्रकटाकृतिः॥ १५५॥
प्राणेश्वरी प्राणदात्री पञ्चाशत्पीठ-रूपिणी।
विशृङ्खला विविक्तस्था वीरमाता वियत्प्रसूः॥ १५६॥
मुकुन्दा मुक्तिनिलया मूलविग्रह-रूपिणी।
भावज्ञा भवरोगघ्नी भवचक्र-प्रवर्तिनी॥ १५७॥
छन्दःसारा शास्त्रसारा मन्त्रसारा तलोदरी।
उदारकीर्तिः उद्दामवैभवा वर्णरूपिणी॥ १५८॥
जन्म-मृत्यु-जरातप्त-जन-विश्रान्ति-दायिनी।
सर्वोपनिष-दुद्घुष्टा शान्त्यतीत-कलात्मिका॥ १५९॥
गम्भीरा गगनान्तस्था गर्विता गानलोलुपा।
कल्पना-रहिता काष्ठा-ऽकान्ता कान्तार्ध-विग्रहा॥ १६०॥
कार्य-कारण-निर्मुक्ता कामकेलि-तरङ्गिता।
कनत्कनक-ताटङ्का लीलाविग्रह-धारिणी॥ १६१॥
अजा क्षयविनिर्मुक्ता मुग्धा क्षिप्र-प्रसादिनी।
अन्तर्मुख-समाराध्या बहिर्मुख-सुदुर्लभा॥ १६२॥
त्रयी त्रिवर्ग-निलया त्रिस्था त्रिपुरमालिनी।
निरामया निरालम्बा स्वात्मारामा सुधास्रुतिः॥ १६३॥
संसारपङ्क-निर्मग्न-समुद्धरण-पण्डिता।
यज्ञप्रिया यज्ञकर्त्री यजमान-स्वरूपिणी॥ १६४॥
धर्माधारा धनाध्यक्षा धनधान्य-विवर्धिनी।
विप्रप्रिया विप्ररूपा विश्वभ्रमण-कारिणी॥ १६५॥
विश्वग्रासा विद्रुमाभा वैष्णवी विष्णुरूपिणी।
अयोनिर्-योनिनिलया कूटस्था कुलरूपिणी॥ १६६॥
वीरगोष्ठीप्रिया वीरा नैष्कर्म्या नादरूपिणी।
विज्ञानकलना कल्या विदग्धा बैन्दवासना॥ १६७॥
तत्त्वाधिका तत्त्वमयी तत्त्वमर्थ-स्वरूपिणी।
सामगानप्रिया सौम्या सदाशिव-कुटुम्बिनी॥ १६८॥
सव्यापसव्य-मार्गस्था सर्वापद्-विनिवारिणी।
स्वस्था स्वभावमधुरा धीरा धीरसमर्चिता॥ १६९॥
चैतन्यार्घ्य-समाराध्या चैतन्य-कुसुमप्रिया।
सदोदिता सदातुष्टा तरुणादित्य-पाटला॥ १७०॥
दक्षिणा-दक्षिणाराध्या दरस्मेर-मुखांबुजा।
कौलिनी-केवला-ऽनर्घ्य-कैवल्यपद-दायिनी॥ १७१॥
स्तोत्रप्रिया स्तुतिमती श्रुति-संस्तुत-वैभवा।
मनस्विनी मानवती महेशी मंगलाकृतिः॥ १७२॥
विश्वमाता जगद्धात्री विशालाक्षी विरागिणी।
प्रगल्भा परमोदारा परामोदा मनोमयी॥ १७३॥
व्योमकेशी विमानस्था वज्रिणी वामकेश्वरी।
पञ्चयज्ञप्रिया पञ्चप्रेत-मञ्चाधिशायिनी॥ १७४॥
पञ्चमी पञ्चभूतेशि पञ्चसंख्योपचारिणी।
शाश्वती शाश्वतैश्वर्या शर्मदा शंभुमोहिनी॥ १७५॥
धरा धरसुता धन्या धर्मिणी धर्मवर्धिनी।
लोकातीता गुणातीता सर्वातीता शमात्मिका॥ १७६॥
बन्धूक-कुसुम-प्रख्या बाला लीलाविनोदिनी।
सुमङ्गली सुखकरी सुवेषाढ्या सुवासिनी॥ १७७॥
सुवासिन्यर्चन-प्रीता शोभना शुद्धमानसा।
बिन्दुतर्पण-संतुष्टा पूर्वजा त्रिपुरांबिका॥ १७८॥
दशमुद्रा-समाराध्या त्रिपुराश्रीवशंकरी।
ज्ञानमुद्रा ज्ञानगम्या ज्ञानज्ञेय-स्वरूपिणी॥ १७९॥
योनिमुद्रा त्रिखण्डेशी त्रिगुणांबा त्रिकोणगा।
अनघा-ऽद्भुतचारित्रा वाञ्छितार्थ-प्रदायिनी॥ १८०॥
अभ्यासातिशय-ज्ञाता षडध्वातीत-रूपिणी।
अव्याज-करुणामूर्ति-रज्ञान-ध्वान्त-दीपिका॥ १८१॥
आबालगोप-विदिता सर्वानुल्लंघ्य-शासना।
श्रीचक्रराज-निलया श्रीमत् त्रिपुरसुन्दरी॥ १८२॥
श्रीशिवा शिवशक्त्यैक्य-रूपिणी ललिताम्बिका॥ ॐ॥
एवं श्रीललितादेव्या नाम्नां साहस्रकं जगुः
॥ इति श्री ब्रह्माण्डपुराणे उत्तरखण्डे
श्री हयग्रीवागस्त्यसंवादे
श्रीललितासहस्रनाम स्तोत्र कथनं संपूर्णं॥